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ॐकारेश्वर ज्योतिर्लिंग

ॐकारेश्वर ज्योतिर्लिंग

ॐकारेश्वर मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में स्थित है। नर्मदा नदी के मध्य ओमकार पर्वत पर स्थित ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर हिंदुओं की चरम आस्था का केंद्र है । ओम्कारेश्वर का यह शिव मंदिर भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में एक माना जाता है और यहां पर मां नर्मदा स्वयं ॐ के आकार में बहती है नर्मदा के उत्तरी तट पर ओंकार पर्वत पर ओमकारेश्वर अत्यंत ही पवित्र व सिद्ध स्थान है । यह द्वीप हिन्दू पवित्र चिन्ह ॐ के आकार में बना है |
यहां दो मंदिर स्थित हैं।
1.ॐकारेश्वर
2.ममलेश्वर
 
ॐकारेश्वर का निर्माण नर्मदा नदी से स्वतः ही हुआ है। 
 हिंदुओं में सभी तीर्थों के दर्शन पश्चात ओंकारेश्वर के दर्शन व पूजन विशेष महत्व है । तीर्थ यात्री सभी तीर्थों का जल लाकर ओमकारेश्वर में अर्पित करते हैं, तभी सारे तीर्थ पूर्ण माने जाते हैं अन्यथा वे अधूरे ही माने जाते हैं | 
अनेक अन्य मंदिरों के साथ ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग नर्मदा जी के दक्षिणी तट पर विराजमान है , द्वादश ज्योतिर्लिंग में उल्लेखित इसका प्राचीन नाम अमरेश्वर महादेव है संभवत वर्षा ऋतु बाढ़ इत्यादि के समय जब ओम्कारेश्वर पहुंचना संभव ना होता होगा तब इसके दर्शन से ही धर्मावलंबी संतुष्ट होते होंगे ।
 
इतिहास व पौराणिक मान्यता 
शास्त्रों के अनुसार कम से कम ५५०० वर्षों से ओंकारेश्वर अनवरत बसा हुआ है। पुराणों में किये गए उल्लेख से यह पता चलता है कि ओंकारेश्वर कई कालों से एक जाना माना हिन्दू तीर्थ स्थल है।

ऐसा माना जाता है कि सतयुग में जब श्री राम के पूर्वज, इक्ष्वाकु वंश के राजा मान्धता, नर्मदा स्थित ओंकारेश्वर पर राज करते थे, तब ओंकारेश्वर की चमक अत्यंत तेज थी। इसकी चमक से आश्चर्य चकित होकर नारद ऋषि भगवान् शिव के पास पहुंचे तथा उनसे इसका कारण पूछा। भगवान् शिव ने कहा कि प्रत्येक युग में इस द्वीप का रूप परिवर्तित होगा। सतयुग में यह एक विशाल चमचमाती मणि, त्रेता युग में स्वर्ण का पहाड़, द्वापर युग में तांबे तथा कलयुग में पत्थर होगा। पत्थर का पहाड़, यह है हमारे कलयुग का ओंकारेश्वर।

 
दूसरी कथा के अनुसार राजा मान्धाता ने यहाँ नर्मदा किनारे इस पर्वत पर घोर तपस्या कर भगवान शिव को प्रसन्न किया और शिवजी के प्रकट होने पर उनसे यहीं निवास करने का वरदान माँग लिया। तभी से उक्त प्रसिद्ध तीर्थ नगरी ओंकार-मान्धाता के रूप में पुकारी जाने लगी। जिस ओंकार शब्द का उच्चारण सर्वप्रथम सृष्टिकर्ता विधाता के मुख से हुआ, वेद का पाठ इसके उच्चारण किए बिना नहीं होता है। इस ओंकार का भौतिक विग्रह ओंकार क्षेत्र है। इसमें 68 तीर्थ हैं। यहाँ 33 करोड़ देवता परिवार सहित निवास करते हैं।
 
 
ओंकारेश्वर में दर्शन का समय
ओंकारेश्वर में दर्शन करने का समय सुबह के दर्शन आप सुबह 5:30 बजे से दोपहर 12:20 तक और शाम के दर्शन 4 से रात10:00 बजे तक कर सकते हैं। ऐसा कहा जाता है कि भगवान शिव व माता पार्वती यहां हर रात 'शयन' करते हैं और इसलिए यहां 'शयन आरती' की जाती है
 
ओमकारेश्वर ज्योतिर्लिंग परिसर
ओम्कारेश्वर में नर्मदा नदी व कावेरी नदी  का संगम है | यहां यात्री स्नान कर धन्य हो जाते है। नदी को नाव द्वारा पर कर मंदिर परिसर में पहुते है। ओमकारेश्वर ज्योतिर्लिंग परिसर एक पांच मंजिला इमारत है जिसकी प्रथम मंजिल पर भगवान महाकालेश्वर का मंदिर है तीसरी मंजिल पर सिद्धनाथ महादेव चौथी मंजिल पर गुप्तेश्वर महादेव और पांचवी मंजिल पर राजेश्वर महादेव का मंदिर है
ओमकारेश्वर मंदिर के  सभामंडप में  साठ  बड़े स्तंभ हैँ जोकि 15 फीट ऊँचे हैं | ओंकारेश्वर लिंग किसी मनुष्य के द्वारा गढ़ा, तराशा या बनाया हुआ नहीं है, बल्कि यह प्राकृतिक शिवलिंग है। इसके चारों ओर हमेशा जल भरा रहता है। प्राय: किसी मन्दिर में लिंग की स्थापना गर्भ गृह के मध्य में की जाती है और उसके ठीक ऊपर शिखर होता है, किन्तु यह ओंकारेश्वर लिंग मन्दिर के गुम्बद के नीचे नहीं है। इसकी एक विशेषता यह भी है। यहाँ सदेव घी का दीपक जलता रहा है |
 
ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग
ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग का प्राचीन नाम अमरेश्वर मंदिर है। यह मंदिर भी पञ्च मंजिला मंदिर है हर मंजिल पर शिवालय है |  इस मंदिर प्रांगण में छह मंदिर और भी हैं | पत्थर के बेहतरीन काम वाला यह मंदिर अब पुरातत्व के अधीन है | देवी अहिल्या बाई के समय से यहाँ शिव पार्थिव पूजन होता रहा है | 
 
धनतेरस पूजन
इस मंदिर पर प्रतिवर्ष दिवाली की बारस की रात को ज्वार चढाने का विशेष महत्त्व है इस रात्रि को जागरण होता है तथा धनतेरस की सुबह ४ बजे से अभिषेक पूजन होता हैं इसके पश्चात् कुबेर महालक्ष्मी का महायज्ञ, हवन, (जिसमे कई जोड़े बैठते हैं, धनतेरस की सुबह कुबेर महालक्ष्मी महायज्ञ नर्मदाजी का तट और ओम्कारेश्वर जैसे स्थान पर होना विशेष फलदायी होता हैं) भंडारा होता है लक्ष्मी वृद्धि पेकेट (सिद्धि) वितरण होता है, जिसे घर पर ले जाकर दीपावली की अमावस को विधि अनुसार धन रखने की जगह पर रखना होता हैं, जिससे घर में प्रचुर धन के साथ सुख शांति आती हैं I इस अवसर पर हजारों भक्त दूर दूर से आते है व् कुबेर का भंडार प्राप्त कर प्रचुर धन के साथ सुख शांति पाते हैं I 
 
ओम्कारेश्वर ज्योतिर्लिंग दर्शन की बुकिंग के लिए आप संपर्क कर सकते हैं info@religioustourism.com या कॉल करें +91 9111791117

  • Admin
  • Dec 05, 2019
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